जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वरमाऊली सरकार
अनंत श्री विभूषित जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वरमाऊली सरकार
जगद्गुरु , कवि और लेखक
मात्रा ३० वर्ष की युवावस्था में श्रीक्षेत्र प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ मेले में आपको जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठीत किया गया । “चलो गाँव की ओर, विकास से समृद्धि की ओर” इस मूल सिद्धांत पर आप निरंतर आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्य कर रहे है। वर्तमान में समाज, देश और धर्म की ज्वलंत समस्याओं एवं जटिल विषयों पर आपके विचारों से रची प्रतिभा संपन्न रचनायें जनजागृती का कार्य सहजता से कर रहे है। आपके कार्य की गरिमा के परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र शासन कि और से श्री रुक्मिणी विदर्भ पीठ को आध्यात्मिक तीर्थक्षेत्र एवं पर्यटन स्थली के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।
अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री राजेश्वरमाऊली सरकार
धर्मगुरु, कवि और लेखक
मात्रा ३० वर्ष की युवावस्था में श्रीक्षेत्र प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ मेले में आपको जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठीत किया गया । “चलो गाँव की ओर, विकास से समृद्धि की ओर” इस मूल सिद्धांत पर आप निरंतर आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्य कर रहे है। वर्तमान में समाज, देश और धर्म की ज्वलंत समस्याओं एवं जटिल विषयों पर आपके विचारों से रची प्रतिभा संपन्न रचनायें जनजागृती का कार्य सहजता से कर रहे है। आपके कार्य की गरिमा के परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र शासन कि और से श्री रुक्मिणी विदर्भ पीठ को आध्यात्मिक तीर्थक्षेत्र एवं पर्यटन स्थली के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।
६ लाख से ज्यादा
फेसबुक फॉलोवर्स
३० वर्ष की आयु
में धर्म गुरु बने
रुक्मिणी पीठ को
आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र की मान्यता दिलवाई
स्वयं की रचनाओं से
जन जागृति
भक्तो के जीवन में गुरु की प्रचिती
कई बार प्रयास करने के बाद मुझे स्वामीजी का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब मैंने उनसे पहला प्रश्न किया, तो उन्होंने जो समाधान बताया, वह बिल्कुल सटीक निकला। आज जीवन में जब भी कोई समस्या या उलझन आती है, तो सबसे पहले स्वामीजी की याद आती है, और उनकी कृपा से हर समस्या का हल मिल जाता है।
सौरभ ठाकरे,नागपुर
8208428627
मैं 2002 में स्वामीजी से जुड़ा। उस समय उनके सानिध्य में रहते हुए मैंने जंगलों और अन्य कई स्थानों पर उनके साथ विचरण किया। स्वामीजी बिना पूछे मेरी अनकही समस्याओं का समाधान सहजता से करते थे।
सुधाकर चोपड़े, कारंजा
9405529381
पहली ही भेंट में मैंने स्वामीजी में असाधारण क्षमता का अनुभव किया। उस समय मैं बेरोजगार था और जीवन में दिशा भटक गई थी। स्वामीजी ने समय-समय पर मेरा धैर्य बढ़ाया। पिछले 24 वर्षों से मैं गुरुपूर्णिमा और 12 दिसंबर को,उनके जन्मदिन पर, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आता हूँ। आज मेरा साधारण जीवन सुख और शांति से परिपूर्ण है।
रमेश तिखट,चंद्रपुर
7798288326
स्वामीजी के बालस्वरूप के प्रथम दर्शन से ही मैं उनकी प्रतिभा से स्तब्ध हो गया। उसी क्षण जीवन में अभूतपूर्व आनंद की अनुभूति हुई और मुझे जीवन की दिशा मिली । स्वामीजी ने प्रेम, सद्भावना और परोपकार से मुझे जीवन में प्रेरित किया।
जितेंद्र पाखरे, यवतमाल
9604558700
अल्प परिचय
आपके द्वारा माता श्री रुक्मीणी की परमपावन प्रागट्यभुमी श्रीक्षेत्र कौंडण्यपुर को पुनर्वैभव दिलाने हेतु श्री रुक्मीणी पीठ की स्थापना की गई है। केवल आध्यात्मिक विचारधारा पे सीमित ना रहेते हुए मानव समाज के सर्वांगीण उन्नति हेतु आपने पंचसूत्र की अवधारणा की, इस पंचसूत्र को जनमानस तक पहुँचाने के लिए जेएमपी फाउंडेशन की नींव रखी। राष्ट्र धर्म संरक्षण हेतु सकल हिंदू समाज के जनजागृति के लिए अखिल भारतीय केसरी धर्मसभा की स्थापना की। मध्यप्रदेश स्थित बहुसंख्यक जनजातीय समुदाय वाले अमरकण्टक तीर्थस्थली में अति प्राचीन श्री फलहारी मठ आश्रम द्वारा ग्रामीण इलाको में शैक्षणिक जागृति, व्यसनमुक्ति कार्यक्रम, आधुनिक युग की आवश्यकता हेतु जनजागरण एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रयासरत है। अखिल भारतीय संत समीती के संरक्षक पद का आप कर्तव्यनिर्वाहन कर रहे है।
वर्ष २०२४ में आप को श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास का संरक्षक नियुक्त किया गया है |
वर्ष १९९९ में श्रीराम नवमी के परम पावन पर्व में आपकी बाल्यावस्था से ही आपकी दिव्य प्रतिभा के परिचय से जनमानस आकर्षित है। आगे चलकर २०१३ में आपको श्री रामानन्दाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया। आपने प्रतिभा के आत्मज्ञान से कठिन एवं जटिल समस्याग्रस्त जनमानस को सहज रूप से समाधान दिलाने का कार्य आपके दिनचर्या का प्रमुख अंग है। आपके अमृतवाणी से हर किसको मानसिक शांति, सुख एवं आनंद का अनुभव होता है। जनसामान्यों को अंधश्रध्दा से दूर करते हुए सत्य शाश्वत हिंदु धर्म जागरण कार्य आप पंचसूत्र की अवधारणा से निरंतर कर रहे है।
राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रमुख कार्यक्रमों में विशेष अतिथि के रूप में आप उपस्थित रहे है। और आपके मार्गदर्शन से एवं प्रगल्भित विचारों से जनमानस प्रभावित हो रहा है। अयोध्या में प्रभु श्री राम प्राणप्रतिष्ठा समारोह, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण, महाकाल लोक कॉरिडोर लोकार्पण, एकात्म धाम ओंकारेश्वर लोकार्पण एवं सांस्कृतिक संसद काशी में आपकी उपस्थिति अविस्मरणीय है।
बड़े संघर्ष के पाश्च्यात अयोध्या में प्रभु श्री राम लला प्रतिष्ठित हो गए अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के मुक्ति आंदोलन का प्रारम्भ हो चूका है |
स्वरचित रचनाओं एवं वैचारिक प्रबोधन से समाज को दी परिवर्तन की दिशा
विगत 25 वर्षोसे अखंड भारतवर्ष के भ्रमण में वर्तमान परिवेश के महत्वपूर्ण घटकों पर अध्ययन के उपरांत परमपुज्य जगद्गुरु स्वामीजी ने मानव जीवनकी अध्यात्मिक व सामाजीक उन्नती के लिए स्वरचित कविताओं तथा स्वयंकी प्रतिभासंपन्न अमृतवाणी से भजनकी समयोचित रचना गाकर एवं प्रबोधन कर समाजमे धर्म एवम राष्ट्र के प्रति कर्तव्यभावना की चेतना जागृति के लिए विभिन्न मंचों और माध्यमों से निरंतर कार्य किया है।
समृध्द राज्य की परिभाषा
जिस राज्य में महापुरुषों के विचार, संतों के वाङ्मय, तिर्थक्षेत्र, ऐतिहासिक शहर, वन वाणिज्य – खनिज, रुढी- परंपरा, संस्कृति, कला – कृति, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा परिपूर्ण संपदा हो वो राज्य समृद्ध है ।
मैं भारत हूँ
मैं भारत हूँ
मैं भारत हूँ
संसार में स्नेह की प्रेरणा हूँ,
में संस्कार संस्कृति की धरोहर हूँ,
स्नेह का उपदेशक हूँ,
मैं भारत हूँ, मैं भारत हूँ,
मैं भारत हूँ।
अनेकता में एकता का भाव हूँ,
विविधता में भी अखंड हूँ,
स्नेह से ओतप्रोत हूँ,
मैं भारत हूँ, मैं भारत हूँ,
मैं भारत हूँ।
कहे रामानंद माऊली,
स्वामीजी की रचनाए
साहित्य से समाज जागरण
मैं ओज हूँ,
मैं तेज हूँ,
मैं शुभाशीष हूँ,
स्नेह – विश्व पहचान हूँ,
मैं भारत हूँ, मैं भारत हूँ,
मैं भारत हूँ।
जगद्गुरु दर्शन
जगद्गुरु का जीवन प्रेरणा और आत्मज्ञान का स्रोत है। उन्होंने योग और आध्यात्मिकता के माध्यम से लाखों लोगों का मार्गदर्शन किया है। उनके अनुभव और शिक्षाएं हमें जीवन के गहरे अर्थ को समझने और आत्मविकास की दिशा में प्रेरित करती हैं।
प्रेरणादायक बातचीत
सद्गुरु की बातचीत जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। उनके विचार सरल होते हुए भी गहन और परिवर्तनकारी हैं, जो जीवन को नई दिशा और उद्देश्य से भर देते हैं। उनके शब्दों में सच्चाई और प्रेरणा का स्रोत छिपा है।
कार्यक्रम रजिस्टर करने हेतु कॉल करे
यदि आप किसी विशेष कार्यक्रम में पंजीकरण करना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गए नंबर पर कॉल करे
पंचसूत्र योग का तत्त्व
पूज्यनीय जगद्गुरु ने मानव जीवन को समृद्ध कराने हेतु अज्ञान तथा असत्य से मुक्ति प्रात
कर शाश्वत सुख का आनंद प्राप्त करने पंचसूत्र योग स्थापित किया है।
-
चन्द्र बुद्धि स्तम्भ
अज्ञान से मुक्ति, ज्ञान की प्राप्ती प्रारंभिक ओजस्वी चंद्रप्रभा माधवीक चंद्र है, रात्री अज्ञानता का नाश पूर्ण प्रभा पौर्णिमा, समग्र जीवन की शिल्पकला बुध्दी का विकास है, शिक्षा आदित्य माधवीक चंद्रोदय है, जीवन जीने के आयाम ही चंद्रबुध्दी स्तंभ है शिक्षा सक्षमीकरण
-
सामाजिक स्तम्भ
असामाजिकता से मुक्ति, सामाजिकता की प्राप्ती
जीवन जीने का मौलिक दंड है सामाजिक स्तंभ, जीवन यापन विचारआचार, व्यक्तित्व का निर्माण, विभूषित अंग मानवता के श्रेणी में उच्चतम स्तंभ है सामाजिक स्तंभ -
यंत्रिक स्तम्भ
कलाहीनता से मुक्ति , कौशल्य की प्राप्ती
हुन्नर शैली का सबसे बडा अविष्कार, जीवन व्यापन करने का आधार, मानवता में साक्षात्कार, हुन्नर ही देता है आकार, बढने का साहस और पुननिर्माण होने का साकार, हुन्नर ही जीवन शैली का आधार ।
-
आद्यौगिक स्तम्भ
भाग्य से मुक्ति , उद्योग की प्राप्ती
जीवन का क्रियान्वित होने वाला अधिस्तंभ जो है, व्यवहार ही उद्योजक है, जीवनशैली में समृध्दी की पूर्तता अलंकारिक सुशोभित करती है, जीवन व्यापन अर्थदंड सूत्र, सर्वांगिक विकास का प्रवाह औद्योगिक स्तंभ है। -
निर्वाण स्तम्भ
असत्य से मुक्ति , शाश्वत सत्य कि प्राप्ती
जीवन और मुक्ती के दोऊ छोर, साकार निराकार परिवाहन है, प्राण व्यान है, उच्चतम आयाम ही आत्मब्रह्म है, जीवब्रह्म गतवान हो और परब्रम्ह में निर्वाण हो, यही है निर्वाण स्तंभ ।

चन्द्र बुद्धि स्तम्भ
प्रारंभिक ओजस्वी चंद्रप्रभा माधवीक चंद्र है, रात्री अज्ञानता का नाश पूर्ण प्रभा पौर्णिमा, समग्र जीवन की शिल्पकला बुध्दी का विकास है, शिक्षा आदित्य माधवीक चंद्रोदय है, जीवन जीने के आयाम ही चंद्रबुध्दी स्तंभ है शिक्षा
- रामानंद पब्लिक स्कुल
- विद्यारम्भ संस्कार
- वेद विज्ञान अनुसंधान संस्थान

सामाजिक स्तम्भ
जीवन जीने का मौलिक दंड है सामाजिक स्तंभ, जीवन यापन विचारआचार, व्यक्तित्व का निर्माण, विभूषित अंग मानवता के श्रेणी में उच्चतम स्तंभ है सामाजिक स्तंभ.
- ग्राम जोड़ो अभियान
- रामानन्द स्नेहयात्रा
- आईबा वरिष्ठ नागरिक सेवा सदन
- प्यासे पेड़ को पानी पिलाओ - P4
- नर्मदा स्वच्छता अभियान
- श्री रुक्मिणी रसोई
- कोरोना वारियर्स
- लोकनाटक से जनजागृति
- जेल में सजा काट रहे क़ैदियों के परिवार की शिक्षा एवं आर्थिक मदद
- रोग चिकित्सा निदान
- रक्तदान
- निःशुल्क चश्मे वितरण एवं निःशुल्क ऑपरेशन
- शैक्षणिक साहित्य वितरण
- नर्मदा परिक्रमवासियों के लिये भोजन एवं निवास व्यवस्था

यंत्रिक स्तम्भ
हुन्नर शैली का सबसे बडा अविष्कार, जीवन व्यापन करने का आधार, मानवता में साक्षात्कार, हुन्नर ही देता है आकार, बढने का साहस और पुननिर्माण होने का साकार, हुन्नर ही जीवन शैली का आधार ।
- राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
- अखिल भारतीय केसरी संस्थान

आद्यौगिक स्तम्भ
जीवन का क्रियान्वित होने वाला अधिस्तंभ जो है, व्यवहार ही उद्योजक है, जीवनशैली में समृध्दी की पूर्तता अलंकारिक सुशोभित करती है, जीवन व्यापन अर्थदंड सूत्र, सर्वांगिक विकास का प्रवाह औद्योगिक स्तंभ है।
- रामानन्द गौशाला एवं अनुसंधान केंद्र
- रोज़गार निर्मिति ग्रामीण विभाग

निर्वाण स्तम्भ
जीवन और मुक्ती के दोऊ छोर, साकार निराकार परिवाहन है, प्राण व्यान है, उच्चतम आयाम ही आत्मब्रह्म है, जीवब्रह्म गतवान हो और परब्रम्ह में निर्वाण हो, यही है निर्वाण स्तंभ ।
- दीपावली
- महाशिवरात्रि
- नवरात्रि
- श्री कृष्णजन्माष्टमी
- श्री गणेशोत्सव
- वैशाख पूर्णिमा
- रामनवमी
- श्री नर्मदा जयंती
- अन्नकुट
- होली
- रक्तदान
- श्री जगद्गुरु राजेश्वरमाऊली जन्मोत्सव
- श्री रामानन्दाचार्य जयंती
- श्री गुरुपूर्णिमा महोत्सव
- श्री रुक्मिणी महोत्सव एवं रथयात्रा
- माता श्री रुक्मिणी संकीर्तन यात्रा
- श्री रुक्मिणी पीठ वारी
- माँ वैशिष्ठा गंगा महारती
श्रीरामनवमी के पावन पर्व पर सर्वप्रथम आगमन
श्रीरामनवमी के पावन पर्व पर सर्वप्रथम आत्मज्ञान एवं त्रिकालदर्शी प्रतिभा की प्रचिती जनमानस को देकर आध्यात्मिक आनंदावस्था में श्री महाकाली माता की उपासना की
1999वन में तपस्या अनुष्ठान
सालबर्डी की ओर प्रस्थान किया । सातपुडा पहाड़ियों के घने वनमें 6 महिने तपस्या अनुष्ठान मे व्यतित करने के पश्चात श्री क्षेत्र अमरकंटक में श्री नर्मदामाता की दर्शन अभिलाषासे देशभ्रमण शुरू किया
2000देशभ्रमण कर अनुभूति प्राप्ती
2001 जनवरी के अंतिम सप्ताहमे सालबर्डी की पहाडीयोंसे डोंगरगढ़ की ओर प्रस्थान किया । माता श्री बम्लेश्वरी के दर्शन लेकर कलकत्ता पहुंचे । माता श्रीदक्षिणेश्वरी महाकाली का दर्शन लिया और बेलूर मठ में जाकर स्वामी विवेकानंद जी एवं परमहंस स्वामी श्री रामकृष्ण जी के जीवन अनुभुती से प्रसन्नचित्त होकर अमरकंटक पधारे
2001गुरुदर्शन एवं नर्मदा परिक्रमा
अमरकंटक में फलहारी मठ के महामंडलेश्वर श्री राघवदासजी महाराज एवं चक्रतीर्थ में श्री श्री १००८ श्री संत हनुमानदासजी महाराज के दर्शन प्राप्त किये |
परमपावन मुहूर्त में श्रीनर्मदा परिक्रमा आरंभ की। परिक्रमा पूर्ण करके काशी प्रस्थान किया। काशी विश्वेश्वर के दर्शन लेकर ओंकारेश्वर क्षेत्र में आकर श्री ओंकारेश्वर भगवान के दर्शन से परिक्रमा की समाप्ती की |
2001महाराष्ट्र में श्री महालक्ष्मी धाम की स्थापना
आश्विन नवरात्री पर्व में सालबर्ड़ी के पहाड़ियों के समीप पाळा ग्राम में श्री महालक्ष्मी धाम आश्रम स्थापित कर कुछ समय साधना एवं तपस्या में लिन रहे।
2001महंत पद पर प्रतिष्ठित हुवे
श्री क्षेत्र नाशिक मे सिंहस्थ कुंभमेले मे दिगंबर अखाडेसे साधुसंतोकी उपस्थितीमें श्री महंताई प्रदान की गई।
2003जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठित
श्री क्षेत्र प्रयागराज महाकुम्भ २०१३ में दिगंबर अखाड़े से तीन अणि अखाड़े निर्मोही , निर्वाण , दिगंबर एवं चतुः संप्रदाय के अध्यक्ष, महामंडलेश्वर, साधु संतो द्वारा श्री जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुवे |
2013श्री रुक्मणी पीठ की स्थापना
श्री रुक्मणी पीठ की स्थापना की और इस पीठ के माध्यम से जनमानस को आध्यात्मिक तथा सामाजिक उन्नति का मार्गदर्शन कर रहे हैं ।
2013अखिल भारतीय संत समिति के संरक्षक बने
अखिल भारतीय संत समिति ने स्वामी जी को समिति के संरक्षक पद पर प्रतिष्ठित किया।
2018श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास का संरक्षक बने
बड़े संघर्ष के पाश्च्यात अयोध्या में प्रभु श्री राम लला प्रतिष्ठित हो गए अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के मुक्ति आंदोलन का प्रारम्भ हो चूका है |
2024