दर्शन

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री राजेश्वरमाऊली सरकार
धर्मगुरु, कवि और लेखक
मात्रा ३० वर्ष की युवावस्था में श्रीक्षेत्र प्रयागराज त्रिवेणी संगम पर महाकुंभ मेले में आपको जगद्गुरु रामानंदाचार्य पद पर प्रतिष्ठीत किया गया । “चलो गाँव की ओर, विकास से समृद्धि की ओर” इस मूल सिद्धांत पर आप निरंतर आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्य कर रहे है। वर्तमान में समाज, देश और धर्म की ज्वलंत समस्याओं एवं जटिल विषयों पर आपके विचारों से रची प्रतिभा संपन्न रचनायें जनजागृती का कार्य सहजता से कर रहे है। आपके कार्य की गरिमा के परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र शासन कि और से श्री रुक्मिणी विदर्भ पीठ को आध्यात्मिक तीर्थक्षेत्र एवं पर्यटन स्थली के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।
भक्तों के अनुभव
कई बार प्रयास करने के बाद मुझे स्वामीजी का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब मैंने उनसे पहला प्रश्न किया, तो उन्होंने जो समाधान बताया, वह बिल्कुल सटीक निकला। आज जीवन में जब भी कोई समस्या या उलझन आती है, तो सबसे पहले स्वामीजी की याद आती है, और उनकी कृपा से हर समस्या का हल मिल जाता है।
सौरभ ठाकरे,नागपुर
8208428627
मैं 2002 में स्वामीजी से जुड़ा। उस समय उनके सानिध्य में रहते हुए मैंने जंगलों और अन्य कई स्थानों पर उनके साथ विचरण किया। स्वामीजी बिना पूछे मेरी अनकही समस्याओं का समाधान सहजता से करते थे।
सुधाकर चोपड़े, कारंजा
9405529381
पहली ही भेंट में मैंने स्वामीजी में असाधारण क्षमता का अनुभव किया। उस समय मैं बेरोजगार था और जीवन में दिशा भटक गई थी। स्वामीजी ने समय-समय पर मेरा धैर्य बढ़ाया। पिछले 24 वर्षों से मैं गुरुपूर्णिमा और 12 दिसंबर को,उनके जन्मदिन पर, उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आता हूँ। आज मेरा साधारण जीवन सुख और शांति से परिपूर्ण है।
रमेश तिखट,चंद्रपुर
7798288326
स्वामीजी के बालस्वरूप के प्रथम दर्शन से ही मैं उनकी प्रतिभा से स्तब्ध हो गया। उसी क्षण जीवन में अभूतपूर्व आनंद की अनुभूति हुई और मुझे जीवन की दिशा मिली । स्वामीजी ने प्रेम, सद्भावना और परोपकार से मुझे जीवन में प्रेरित किया।
जितेंद्र पाखरे, यवतमाल
9604558700