हमारे बारे
में
श्री रुक्मिणी जन्मभूमि
विदर्भ पीठ
"आध्यात्मिकता, संस्कृति और सेवा के माध्यम से
श्रीक्षेत्र कौंडण्यपुर की पावन धरोहर को
पुनर्वैभव प्रदान करने का एक पावन संकल्प।"
आध्यात्मिकता, संस्कृति
और सेवा का संगम
श्री रुक्मिणी जन्मभूमि विदर्भ पीठ एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना का केंद्र है। हमारा उद्देश्य श्रीक्षेत्र कौंडण्यपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को पुनः प्रतिष्ठित करते हुए धर्म, संस्कृति, समाज और मानव जीवन के सर्वांगीण विकास की दिशा में कार्य करना है।
माता श्री रुक्मिणी की पावन जन्मभूमि को एक भव्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने के संकल्प के साथ पीठ निरंतर आगे बढ़ रही है।
हमारे प्रेरणास्रोत एवं संस्थापक
श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य
स्वामी राजेश्वरमाऊली सरकार
श्री रुक्मिणी जन्मभूमि विदर्भ पीठ के संस्थापक, श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वरमाऊली सरकार धर्म, संस्कृति, समाजसेवा और जनजागरण के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
उनकी कार्यदृष्टि आध्यात्मिक चेतना के साथ समाज, गाँव और संस्कृति के विकास से जुड़ी है।
"चलो गाँव की ओर,
"
विकास से समृद्धि की ओर
हमारा संकल्प
पावन जन्मभूमि से भव्य
आध्यात्मिक धरोहर तक
माता श्री रुक्मिणी की पावन जन्मभूमि को एक भव्य और स्थायी आध्यात्मिक धरोहर के रूप में विकसित करना हमारा प्रमुख संकल्प है।
यह केवल एक मंदिर निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि एक ऐसे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक सेवा केंद्र के निर्माण की व्यापक परिकल्पना है।
हमारी दृष्टि
धर्म से समाज, समाज से समृद्धि
धर्म एवं संस्कृति
भारतीय धर्म, संस्कृति एवं आस्था की परंपरा को पुनर्जीवित कर आधुनिक युग में उसे समर्पित चेतना से पुनः स्थापित करना।
आध्यात्मिक जागरण
सत्संग, साधना एवं ध्यान के माध्यम से व्यक्ति और समाज में आंतरिक चेतना का जागरण।
ग्रामीण विकास
गाँव की ओर — ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास, रोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर प्रयास।
शिक्षा एवं जागरूकता
मूल्य आधारित शिक्षा, अनुशासन एवं संस्कारों के माध्यम से नई पीढ़ी में जागरूकता का संचार।
प्रकृति एवं पर्यावरण
वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संतुलन के प्रति समर्पित दृष्टि से पर्यावरण का संरक्षण।
सामाजिक समरसता
समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव, समानता एवं राष्ट्रीय एकता की भावना का संवर्धन।
पंचसूत्र की अवधारणा
विकास की पाँच सूत्र रूप दिशाएँ, एक केंद्रीय आध्यात्मिक चेतना से जुड़ी हुई — यही पीठ की कार्यपद्धति का मूल आधार है।
उन्नति
जागरूकता
पर्यावरण
समरसता
विकास
उन्नति
जागरूकता
पर्यावरण
समरसता
हमारी प्रमुख पहल
श्री गुरुमंदिर
संत परंपरा एवं गुरुशिष्य परंपरा के केंद्र के रूप में भव्य गुरुमंदिर का निर्माण।
सत्संग भवन
आध्यात्मिक प्रवचन, कीर्तन एवं सत्संग आयोजनों हेतु विशाल सभागार।
श्री रुक्मिणी रसोई प्रसादालय
यात्रियों एवं श्रद्धालुओं हेतु निःशुल्क एवं सात्विक प्रसाद व्यवस्था।
श्री रामानंदाचार्य पब्लिक स्कूल
मूल्य आधारित आधुनिक शिक्षा प्रदान करती पीठ की प्रमुख शैक्षिक संस्था।
आस्था के साथ विकास की नई दिशा
इस पावन यात्रा का प्रभाव केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने वाला है।
- ✨धार्मिक पर्यटन में वृद्धि
कौंडण्यपुर को एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में स्थापित करने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा।
- 👥स्थानीय रोजगार के अवसर
निर्माण, प्रशासन एवं सेवा क्षेत्र में क्षेत्रीय रोजगार सृजन।
- 📖सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा
मूल्य आधारित शिक्षा एवं संस्कारों के संवर्धन से समाज का सर्वांगीण उन्नयन।
- 📈क्षेत्रीय आर्थिक विकास
पर्यटन, व्यापार एवं सेवा क्षेत्र के विस्तार से क्षेत्रीय आर्थिक समृद्धि।
सेवा, समाज और जनसहभागिता
पीठ की प्रत्येक गतिविधि समाज से जुड़ी — सेवा, संस्कार एवं सहभागिता के साथ।
उत्सव, परंपरा और जनजागरण
श्री रामानंदाचार्य जयंती
संप्रदाय के आचार्य परंपरा की पावन स्मृति में आयोजित वार्षिक जयंती महोत्सव — ज्ञान, भक्ति एवं सेवा का अनुपम संगम।
श्री जगद्गुरु राजेश्वरमाऊली जन्मोत्सव
पीठ के संस्थापक की पावन स्मृति में मनाया जाने वाला वार्षिक जन्मोत्सव — भक्ति, सत्संग, भंडारा एवं जनजागरण का महापर्व।
वार्षिक सत्संग महोत्सव
वर्षभर आयोजित सत्संग शिविर, भंडारा, ग्राम सेवा शिविर एवं जनजागरण अभियानों की वर्षांतिम समापन संगोष्ठी।
भव्यता की ओर बढ़ता एक पावन संकल्प
आइए, इस पावन संकल्प का हिस्सा बनें
"श्री रुक्मिणी जन्मभूमि के विकास और एक भव्य आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक केंद्र के निर्माण की इस पावन यात्रा में आपका सहयोग महत्वपूर्ण है।"

