Rukmini Pith

वनांचल

वनांचल एक कदम जीवन परिवर्तन की ओर

१६ वी सदीसे अमरकंटक में स्थापित श्री फलहारीमठ आश्रम से बहुसंख्य जनजातीय समाज हमेशा से गादीपतियों से अनुग्रहीत रहा है।

वर्तमान में ईसी परंपरा को आधुनिक युग की विचारधारा से आगे बढानेका कार्य पूजनीय जगद्गुरु कर रहे है। स्नेहसंवाद, स्नेहमिलन, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिता और सामाजिक समरसता हेतु आयोजित अनेक कार्यक्रमों में जनजाति समाज हमेशा से अग्रसर रहा है। श्री रामनवमी यात्रा और गुरुपौर्णिमा ये मुख्य कार्यक्रमों में जनजाति सहभागिता के साथ बड़े पैमाने में मनाये जाते है।
पिछले दशकसे जनजातिय युवा खिलाडीयोंके लिए आंतरराज्यीय फुटबॉल प्रतियोगीता एवं सांस्कृतिक कलाओंकी प्रतियोगीता का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र मे पारंपारीक कलागुणोंका विकास एवं संवर्धन करने हेतु विविध उपक्रमोंका आयोजन किया जाता है। जनजातिय जनों को नशमुक्त रहने के लिए एवं जीवन की प्राथमिक ज़रूरत पूर्ति हेतु जीवन में रोज़गार पूरक शिक्षा का जनजागरण नियमित किया जा रहा है । परिणामस्वरुप आज जनजातीय बहुसंख्य युवा युवतियों को शैक्षणिक स्तर बढ़ता दिखाई दे रहा है। जेएमपी फाउंडेशन द्वारा छोटे बालकोंको संस्कारित करने हेतु विद्यारंभ संस्कार, बाल संस्कार जैसे अनेक विध उपक्रम शुरू है। खेती के साथ मे मासीक आयमे बढ़ोतरी हेत् छोटे छोटे ग्रुहउद्योग शुरु किये जा रहे है। पिछडे समाजवर्गको आधुनिक विज्ञानयुग में आगे बढनेके लिए विभिन्न स्तरों पर निरंतर जनजाग्रुती कार्य शुरू है।

पूजनीय जगद्गुरु श्री राजेश्वरमाऊली
पूजनीय जगद्गुरु श्री राजेश्वरमाऊलीधर्मगुरु, कवि और लेखक
समयानुकुल आचरण ही सत्य सनातन धर्म का परिपाठ
पूजनीय जगद्गुरु श्री राजेश्वरमाऊली
पूजनीय जगद्गुरु श्री राजेश्वरमाऊलीधर्मगुरु, कवि और लेखक
हिंदू धर्म, संस्कार, आचार, विचार एवं भगवतगीता और राष्ट्र भक्ती की शिक्षा बालकोको देना जरुरी

पंचसूत्र योग का तत्त्व

पूज्यनीय जगद्गुरु ने मानव जीवन को समृद्ध कराने हेतु अज्ञान तथा असत्य से मुक्ति प्रात कर शाश्वत सुख का आनंद प्राप्त करने पंचसूत्र योग स्थापित किया है।